किसान की लड़की ने अखबार पढ़कर पास की आईएस की परीक्षा जाने इनकी संघर्ष की कहानी

कहते हैं की सफलता उन्हें ही मिलती है जो कुछ कर दिखने का जज्बा रखते है. ऐसे लोगों के लिए बड़ी से बड़ी प्रॉब्लम बहुत छोटी होती है. ऐसे लोग कुछ ऐसा कर जाते हैं की दुनिया उन्हें सलाम करने लगती है. आज हम एक ऐसी आईएस किसान की बेटी की सफलता की कहानी आपको बताने वाले है जिसने आईएस की परीक्षा में 65वीं रैंक हासिल करके अपने समाज एंव अपने परिवार का मान बढाया है. यह किसान की बेटी कैसे इस पोस्ट (पद) तक आई आइये जानते है.

IAS Annies kanmani joy success struggle story, आईएस एनिस कनमनी जॉय –

एनिस केरल की रहने वाली है और एक कृषि परिवार से है. एनिस ने 2011 में आईएस एग्जाम में 65वीं रैंक हासिल की है. आपको बता दूँ की एनिस को यह सफलता पहली बार नहीं मिली उसने बहुत बार कोशिश की उसके बाद उन्होंने आईएस जैसी परीक्षा को क्रेक किया है. एनिस के पिता के पास इतना पैसा नहीं था की वह उसे कोचिंग करवा पाते इसलिए एनिस ने कभी भी कोचिंग जाने की जिद्द नही की और बस अपने तरीके से पढ़ती रही. एनिस केरल के एर्नाकुलम जिले के पंपकूडा की रहने वाली है. इनके पास बीएससी से नर्सिंग की डिग्री भी है.

बहन ने बताया परीक्षा के बारें में –

एनिस कहती है की उसने अपनी बहन के बताने के बाद यूपीएससी जैसी एग्जाम के बारें में जाना एंव मैंने भी ठान लिया था की अगर समाज में कुछ बदलाव लाना है तो उन्हें खुद मैदान में आना होगा और उसी समय से वह अपनी तैयारी में लग गई. एनिस कहती है की मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा था की मैं एग्जाम फाइट कर लुंगी और आज मैंने सफलता पा भी ली है.

 

अख़बार पढ़कर करी तैयारी –

एनिस कहती है की कोचिंग जाने के पैसे नहीं थे इसलिए अख़बार और करंट अफ्येर्स से मैं अपने आप को अपडेट रखती थी. यही कारण था की मैं खुद अपडेट रहती थी और आज मैंने सिविल परीक्षा पास करके मेरे परिवार और मेरी खुद की मेहनत को रंग दिया है. मैं सोच सकती हूँ मैंने अपनी जिंदगी में कितने बड़े पायदान को पाया है.

इंटरव्यू के समय आँखों में आ गया था पानी –

एनिस कहती है की मैंने 2010 में भी सिविल परीक्षा पास की थी पर मैं अपनी रैंकिग से खुश नहीं थी. अब मैंने 2011 में 65वीं रैंक हासिल करके अपने जीवन का एक बहुत बड़ा सपना पूरा कर लिया है. जब मुझे पता चला की मैंने परीक्षा पास कर ली है तब मैं रेल में थी और आँखों में पानी आ गया था. यह आंसू ख़ुशी के आंसू थे जो मेरी जीत की ख़ुशी में आये थे.

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